Neeraj chopra's kundli analysis
*नीरज चोपड़ा को उच्च के मंगल ने दिलवाया स्वर्ण पदक - सुमन्त शर्मा*
मनुष्य का शिक्षा के बाद करियर ही जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष होता है। जहाँ अधिकांश लोग तकनीकी क्षेत्र (इंजीनियरिंग, मेडिकल, आर्किटेक आदि), मैनेजमेंट, मार्केटिंग, बिजनेस आदि में करियर बनाने के इच्छुक होते है। वहीँ कुछ लोगों को बचपन से ही खेलों में रुचि होती है। और अपनी खेलने की प्रतिभा को ही वो अपना करियर बना लेते हैं। अगर ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखें तो यदि व्यक्ति में किसी विशेष प्रतिभा का उदय होता है तो इसमें उसकी जन्मकुंडली में बने ग्रह योगों की ही भूमिका होती है। यह कहना है "नक्षत्र ज्योतिष शोध केंद्र" के संचालक "प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य सुमन्त शर्मा" जी का, उन्होंने बताया अगर हम खेलों को करियर बनाने के बारे में सोचें तो हमे जातक की कुंडली में मंगल की पोजीशन को देखना होगा, क्योंकि विशेष रूप से तो मंगल" को ही खेलों या स्पोर्ट्स का कारक माना गया है। क्योंको खेलों में सफलता के लिए व्यक्ति का शारीरिक गठन, मांसपेशियां, फिटनेस और कार्य और पुरुषार्थ-क्षमता बहुत अच्छी होनी चाहिए। इसके इलावा हिम्मत, शक्ति, पराक्रम, निर्भयता और प्रतिस्पर्धा का सामना करना एक अच्छे खिलाडी के गुण होते हैं। और इन सभी का नियंत्रक ग्रह मंगल होता है। इसलिए खेल में जाने के लिए हमारी कुंडली में मंगल का अच्छी स्थिति में होना बहुत आवश्यक है। शुभ मंगल के प्रबल प्रभाव वाले जातक स्वभाव से जुझारू होते हैं तथा विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत से काम लेते हैं तथा सफलता प्राप्त करने के लिए बार-बार प्रयत्न करते रहते हैं और अपने रास्ते में आने वाली बाधाओं तथा मुश्किलों से विचलित नहीं होते।
शुभ मंगल का प्रभाव देखिए कि भारतीय क्रिकेट में अपना सुनहरा नाम लिखने वाले भारत रत्न सचिन तेंदुलकर की कुंडली में "मंगल" अपनी उच्च राशि मकर में बैठा है। जो खेलों में सफलता दिलाने का बहुत अच्छा योग है। भारतीय टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा की कुंडली में भी मंगल चौथे भाव में अपनी उच्च राशि मकर में बैठा है। इसके इलावा दुनिया भर में भारत का नाम रोशन करने वाले हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद जी की जन्म कुंडली में मंगल छटे भाव में स्व राशि में बैठा है।
अब हम बात करते है नीरज चोपड़ा की कुंडली की तो इनका जन्म 24 दिसंबर 1997 को पानीपत में हुआ है। उनकी कुंडली में भी पंचमेश मंगल, मकर राशि अर्थात अपनी उच्च राशि मे बली हो कर बैठा हुआ है और वह नीचराशी गुरु के साथ होने के कारण गुरु का नीच भंग भी कर रहा है। इन सबके इलावा अभी वर्तमान में उनकी लग्नेश गुरु की महादशा भी चल रही है। ज्योतिष के अनुसार जिसकी जातक की कुंडली में शुभ भावों के स्वामी ग्रहों का अगर नीच भंग हो रहा हो और वे शुभ स्थिति में हो और नीच भंग होने वाले या उनका नीच भंग करने वाले ग्रह की महादशा, अंतर्दशा या प्रत्यंतर दशा जीवन काल में आ जाए तो ऐसे जातक उस अवधि में सफलता के शीर्ष पर पहुँच जाते है।
ज्योतिषाचार्य सुमन्त शर्मा ने कहा कि कुंडली मे मौजूद इन सब योगों ने ही नीरज चोपड़ा को खेलकूद के क्षेत्र में शुरू से ही सफलता दिलवाई और अब ओलंपिक खेलों में इन्होंने स्वर्ण पदक जीत कर पूरे भारतवर्ष का पूरी दुनिया मे नाम रोशन कर दिया है । सुमन्त शर्मा जी ने बताया कि ज्योतिष एक विज्ञान है। ज्योतिष में मौजूद कुछ विशेष योग कैसे किसी व्यक्ति को अर्श तक पंहुचा देते है नीरज चोपड़ा की कुंडली ने एक बार फिर ज्योतिषी सत्यता पर मोहर लगा दी है।




Comments
Post a Comment